जिसे तुमने ठुकराया, उसने अपनी आँखों से तुम्हें दुनिया दिखाई।
माँ की कीमत
एक औरत थी…
वो देख नहीं सकती थी।
उसका एक बेटा था,
लेकिन उसकी यही कमी
उस बेटे के लिए शर्म बन गई थी।
स्कूल में बच्चे उसे चिढ़ाते थे —
“देखो, अंधी का बेटा आ गया…”
हर दिन, हर जगह,
उसे यही सुनना पड़ता था।
धीरे-धीरे वो अपने ही माँ से
नफरत करने लगा।
उसे अपनी माँ के साथ
कहीं जाना पसंद नहीं था…
वो उससे दूर रहना चाहता था।
लेकिन उसकी माँ ने
कभी शिकायत नहीं की।
वो चुपचाप मेहनत करती रही,
अपने बेटे को पढ़ाया,
उसे काबिल बनाया…
ताकि वो अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
समय बीता…
बेटा बड़ा आदमी बन गया।
लेकिन जैसे-जैसे वो आगे बढ़ा,
वो अपनी माँ से दूर होता गया।
आखिरकार उसने
अपनी माँ को छोड़ दिया।
एक दिन…
एक बूढ़ी औरत उसके घर आई।
गार्ड से बोली —
“मुझे अपने बेटे से मिलना है…”
जब बेटे को पता चला,
तो उसने कह दिया —
“बोल दो मैं घर पर नहीं हूँ…”
बूढ़ी औरत चुपचाप
वहाँ से चली गई…
कुछ देर बाद
जब वो ऑफिस के लिए निकला,
तो रास्ते में भीड़ लगी देखी।
जिज्ञासा में वो वहाँ गया…
और जो देखा,
उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
वहाँ उसकी माँ
मरी हुई पड़ी थी…
उसकी मुट्ठी में
एक कागज़ था…
जब उसने खोला,
तो उसमें लिखा था —
बेटा,
जब तू छोटा था,
एक हादसे में तेरी आँख चली गई थी…
तू अंधा हो गया था…
इसलिए मैंने अपनी आँखें
तुझे दे दी…”
ये पढ़ते ही
वो फूट-फूट कर रोने लगा…
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
सीख
दोस्तों…
समय रहते अपनों की कद्र करना सीखो।
माँ-बाप का कर्ज
कभी नहीं चुकाया जा सकता।
हमारी आदत भी अजीब है…
कभी समंदर को ठुकरा देते हैं,
तो कभी आँसुओं को भी पी जाते हैं।
माँ के हाथ का खाना
हमेशा खास होता है…
चाहे वो कितना भी साधारण क्यों ना हो।
यह एक भावुक हिंदी कहानी है जिसमें एक माँ अपने बेटे के लिए सब कुछ कुर्बान कर देती है। पढ़ें और समझें माँ-बाप की असली कीमत।
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