Target Maturity Funds 2026 क्या हैं? जानें Bharat Bond ETF, 7.2%-7.6% अनुमानित YTM, बैंक FD से तुलना, टैक्स नियम और निवेश करने का तरीका।

भारतीय निवेशकों के लिए पारंपरिक रूप से बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank FD) सुरक्षा का सबसे प्रमुख साधन रहा है। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति, वार्षिक कर कटौती और कम तरलता के कारण एफडी का वास्तविक लाभ सीमित हो चुका है। ऐसे समय में डेट मार्केट में टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMFs) और भारत बॉन्ड ईटीएफ (Bharat Bond ETF) एक अत्यंत सुरक्षित, पारदर्शी और कुशल विकल्प के रूप में उभरे हैं।
1. प्रस्तावना: पारंपरिक बैंक एफडी की कमियां और फिक्स्ड इनकम का नया विकल्प
फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो का निर्माण करते समय निवेशक स्थिरता और पूंजी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। बैंक एफडी लोकप्रिय तो है, लेकिन इसमें कई ऐसी संरचनात्मक कमियां हैं जो दीर्घकालिक संपदा निर्माण को प्रभावित करती हैं:
- वार्षिक टीडीएस (TDS) कटौती से चक्रवृद्धि ब्याज का नुकसान: बैंक एफडी पर अर्जित ब्याज यदि निर्धारित सीमा से अधिक हो, तो बैंक हर वित्त वर्ष में 10% टीडीएस काट लेते हैं। यह कटौती तब भी होती है जब मैच्योरिटी अवधि कई साल दूर हो। परिणामस्वरूप, वह धनराशि जिस पर आपको ब्याज मिल सकता था, सरकारी कर के रूप में तुरंत कट जाती है और कम्पाउंडिंग (Power of Compounding) की गति धीमी हो जाती है।
- समय से पहले एफडी तोड़ने पर पेनाल्टी: आपातकाल में यदि मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ी जाती है, तो बैंक 0.50% से 1.00% तक की प्री-क्लोजर पेनाल्टी लगाते हैं। इसके साथ ही ब्याज दर भी उस छोटी अवधि की लागू की जाती है, जिससे निवेशक को दोहरा आर्थिक नुकसान होता है।
- सीमित सुरक्षा दायरा (₹5 लाख की DICGC सीमा): डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के तहत एक बैंक में केवल ₹5 लाख तक की जमाराशि (मूलधन + ब्याज) ही बीमाकृत होती है। इससे अधिक की राशि पर संबंधित बैंक का सॉल्वेंसी जोखिम बना रहता है।
- विनियमित और आधुनिक समाधान: इन समस्याओं के समाधान के रूप में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और AMFI India द्वारा मान्यता प्राप्त टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMFs) एक पारदर्शी विकल्प प्रस्तुत करते हैं।
- 100% सॉवरेन व पीएसयू आधारित पोर्टफोलियो: यह फंड मुख्य रूप से केंद्र सरकार की सिक्योरिटीज (G-Secs), राज्य विकास ऋणों (SDLs) और शीर्ष महारत्न/नवरत्न सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के ‘AAA’ रेटेड बॉन्ड्स में निवेश करते हैं, जिससे डिफ़ॉल्ट का जोखिम नगण्य हो जाता है।
2. टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMFs) क्या हैं और कैसे काम करते हैं?
टारगेट मैच्योरिटी फंड्स ओपन-एंडेड पैसिव डेट म्यूचुअल फंड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) होते हैं, जो एक विशिष्ट बेंचमार्क इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और जिनकी एक निश्चित परिपक्वता तिथि (Maturity Date) पहले से तय होती है (जैसे अप्रैल 2026, अप्रैल 2030, आदि)।
रोल-डाउन रणनीति (Roll-Down Strategy) की कार्यप्रणाली
पारंपरिक डेट फंड्स निरंतर नए बॉन्ड खरीदते-बेचते रहते हैं, जिससे उनका ड्यूरेशन हमेशा बना रहता है। इसके विपरीत, टीएमएफ “रोल-डाउन रणनीति” पर कार्य करते हैं:
- फंड प्रबंधक पोर्टफोलियो में केवल वही बॉन्ड शामिल करते हैं जिनकी परिपक्वता अवधि फंड की लक्षित मैच्योरिटी तारीख के समान होती है।
- जैसे-जैसे समय बीतता है, इन बॉन्ड्स की अवशिष्ट परिपक्वता (Residual Maturity) स्वतः घटती जाती है।
- मैच्योरिटी नजदीक आने पर ब्याज दर जोखिम (Interest Rate Risk) घटकर व्यावहारिक रूप से शून्य हो जाता है। यदि निवेशक परिपक्वता तक निवेशित रहता है, तो उसे प्रवेश के समय दर्शायी गई इंडिकेटिव यील्ड (YTM) लगभग पूरी प्राप्त होती है।
अंतर्निहित उच्च-सुरक्षा परिसंपत्तियां (Underlying Assets)
TMFs किसी भी निजी या जोखिम भरे कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश नहीं करते। इनका निवेश पोर्टफोलियो निम्नलिखित तीन वर्गों तक सीमित रहता है:
- केंद्र सरकार की सिक्योरिटीज (Central Government G-Secs): यह सीधे भारत सरकार द्वारा जारी की जाती हैं, जिनमें 100% सॉवरेन गारंटी होती है।
- राज्य विकास ऋण (State Development Loans – SDLs): विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा रिजर्व बैंक के माध्यम से जारी किए जाने वाले बॉन्ड, जिन पर सॉवरेन जैसी साख होती है।
- शीर्ष पीएसयू के ‘AAA’ रेटेड बॉन्ड्स: देश के मजबूत बुनियादी ढांचे वाले उपक्रम, जैसे NHAI, REC, PFC, IRFC, NTPC और PowerGrid।
3. TMFs बनाम बैंक एफडी बनाम पारंपरिक ओपन-एंडेड डेट फंड्स (Comparison Matrix)
| विशेषता / पैरामीटर | टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (TMFs / Bharat Bond) | बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank FD) | पारंपरिक ओपन-एंडेड डेट फंड्स |
|---|---|---|---|
| क्रेडिट सुरक्षा | 100% सॉवरेन और ‘AAA’ पीएसयू बैकिंग | DICGC के तहत केवल ₹5 लाख तक सुरक्षित | फंड के क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर (क्रेडिट जोखिम संभव) |
| ब्याज दर जोखिम | मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर शून्य जोखिम | शून्य (लेकिन पुनर्निवेश पर दर बदलने का जोखिम) | हमेशा सक्रिय (ब्याज दर बढ़ने पर NAV गिरने का खतरा) |
| वार्षिक TDS कटौती | 0% (सालाना कोई टीडीएस नहीं कटता) | 10% टीडीएस हर साल काटा जाता है | 0% (केवल यूनिट भुनाने पर कर देय) |
| तरलता (Liquidity) | एक्सचेंजों (NSE/BSE) पर तत्काल बिक्री या AMC से रिडेम्पशन | समय से पहले निकासी पर पेनल्टी और कम ब्याज | कार्यदिवस पर बिना पेनल्टी निकासी संभव |
| व्यय अनुपात (TER) | न्यूनतम व्यय अनुपात (0.0005% से 0.05%) | लागू नहीं (बैंक का स्प्रेड अंतर्निहित होता है) | अपेक्षाकृत अधिक (0.30% से 1.25% तक) |
| रिटर्न की दृश्यता | प्रवेश के समय YTM से रिटर्न का स्पष्ट अनुमान | एफडी रसीद पर दर निश्चित | अनिश्चित (बाजार के रुख पर निर्भर) |
4. भारत में प्रमुख टारगेट मैच्योरिटी फंड्स व भारत बॉन्ड ईटीएफ की सूची
वर्तमान में भारतीय बाजार में उपलब्ध कुछ प्रमुख टारगेट मैच्योरिटी फंड्स और भारत बॉन्ड ईटीएफ की विवरण सूची इस प्रकार है:
| फंड / योजना का नाम | प्रकार / श्रेणी | पोर्टफोलियो संरचना | सांकेतिक YTM (अनुमानित) | मैच्योरिटी वर्ष |
|---|---|---|---|---|
| Bharat Bond ETF / FOF – April 2030 | Edelweiss AMC | AAA CPSEs (PFC, REC, IRFC आदि) | ~7.35% | अप्रैल 2030 |
| Bharat Bond ETF / FOF – April 2031 | Edelweiss AMC | AAA CPSEs | ~7.42% | अप्रैल 2031 |
| Bharat Bond ETF / FOF – April 2032 | Edelweiss AMC | AAA CPSEs | ~7.50% | अप्रैल 2032 |
| Bharat Bond ETF / FOF – April 2033 | Edelweiss AMC | AAA CPSEs | ~7.55% | अप्रैल 2033 |
| Axis CRISIL IBX SDL May 2027 Index Fund | Axis Mutual Fund | State Development Loans (SDLs) | ~7.20% | मई 2027 |
| HDFC Nifty G-Sec Jun 2027 / Dec 2036 | HDFC Mutual Fund | भारत सरकार की सिक्योरिटीज (G-Secs) | ~7.25% – 7.45% | जून 2027 / दिस. 2036 |
| SBI CPSE Bond Plus SDL Sep 2026 Index Fund | SBI Mutual Fund | CPSE बॉन्ड्स और राज्य विकास ऋण | ~7.15% | सितंबर 2026 |
नोट: यील्ड टू मैच्योरिटी (YTM) बाजार की दैनिक स्थितियों के अनुसार मामूली रूप से बदल सकती है। वास्तविक रिटर्न निवेश के समय उपलब्ध YTM और एक्सपेंस रेशियो पर आधारित होता है।
5. रिटर्न और कंपाउंडिंग का गणित: टैक्स डेफरल (Tax Deferral) का बड़ा फायदा
टारगेट मैच्योरिटी फंड्स का सबसे सशक्त वित्तीय लाभ इसका टैक्स डेफरल (Tax Deferral) तंत्र है।
बैंक एफडी बनाम TMF कम्पाउंडिंग विश्लेषण
जब आप बैंक एफडी में ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो बैंक हर साल आपके ब्याज से टीडीएस काटकर सरकार को जमा करता है। इसका अर्थ यह है कि अगले साल आपको कम मूलधन पर ब्याज मिलता है।
इसके विपरीत, टारगेट मैच्योरिटी फंड्स में जब तक आप अपनी यूनिट्स को बेचते (Redeem) नहीं हैं, तब तक किसी भी प्रकार का कर नहीं काटा जाता। अर्जित संपूर्ण ब्याज फंड में ही पुनर्निवेशित होता रहता है और उस पर भी रिटर्न बनता है।
उदाहरण: ₹10 लाख का निवेश @ 7.50% वार्षिक रिटर्न (7 वर्ष की अवधि)
बैंक एफडी (वार्षिक 10% TDS कटौती के बाद पुनर्निवेश):
* संचित अंतिम कोष: ~₹15,75,000
टारगेट मैच्योरिटी फंड (शून्य वार्षिक TDS, पूर्ण कंपाउंडिंग):
* संचित अंतिम कोष (प्री-टैक्स): ~₹16,59,000
* टैक्स भुगतान के बाद शुद्ध लाभ: बैंक एफडी की तुलना में अतिरिक्त ₹80,000 से ₹1,20,000 तक की बचत।
कराधान नियम (Section 50AA)
फाइनेंस एक्ट 2023 के तहत लागू नए नियमों (धारा 50AA) के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए ऐसे डेट फंड्स जिनमें घरेलू इक्विटी 35% से कम है, उनसे प्राप्त लाभ को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) माना जाता है। यह लाभ निवेशक के व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार कर-योग्य होता है।
हालांकि टैक्स स्लैब एफडी जैसा ही है, लेकिन बिना वार्षिक टीडीएस कटौती के पूरे 7-8 साल तक मिलने वाला कंपाउंडिंग का लाभ TMFs को बैंक एफडी से अधिक प्रतिस्पर्धी बना देता है।
6. निवेश कैसे करें? (Step-by-Step Investment Process)
निवेशक अपनी सुविधानुसार दो अलग-अलग माध्यमों से टारगेट मैच्योरिटी फंड्स में प्रवेश कर सकते हैं:
तरीका 1: डीमैट खाते के माध्यम से (ईटीएफ रूट)
यदि आपके पास Zerodha, Groww, AngelOne, या Upstox जैसा ब्रोकिंग और डीमैट खाता उपलब्ध है:
- अपने ब्रोकर ऐप में Bharat Bond ETF (जैसे: BHARATBOND26, BHARATBOND30) सर्च करें।
- शेयर बाजार के कारोबारी घंटों (सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक) के दौरान लाइव मार्केट प्राइस पर आवश्यक यूनिट्स खरीदें।
- यह यूनिट्स सीधे आपके डीमैट खाते में सुरक्षित जमा हो जाएंगी।
तरीका 2: बिना डीमैट खाते के (फंड ऑफ फंड्स / FOF या इंडेक्स फंड रूट)
यदि आपके पास डीमैट खाता नहीं है, तो भी आप सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह निवेश कर सकते हैं:
- MFCentral पोर्टल या किसी भी म्यूचुअल फंड वितरक ऐप के जरिए ‘Bharat Bond FOF’ या किसी बैंक के TMF इंडेक्स फंड का चयन करें।
- यहां आप न्यूनतम ₹100 या ₹500 से एकमुश्त (Lump sum) अथवा व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) शुरू कर सकते हैं।
- इसका NAV दैनिक आधार पर तय होता है और यूनिट्स सीधे आपके म्यूचुअल फंड फोलियो में जमा होती हैं।
वित्तीय लक्ष्यों के साथ मैच्योरिटी का मिलान
TMFs में निवेश का स्वर्णिम नियम यह है कि फंड की परिपक्वता तिथि आपके वास्तविक वित्तीय लक्ष्य से मेल खानी चाहिए:
- बच्चों की कॉलेज प्रवेश फीस (2030): Bharat Bond ETF April 2030 का चयन करें।
- गृह ऋण की डाउन पेमेंट (2032): Bharat Bond ETF April 2032 में योजना बनाएं।
- अल्पकालिक पूंजी संरक्षण (2026-27): 2026 या 2027 मैच्योरिटी वाले SDL या CPSE इंडेक्स फंड चुनें।
7. किसे निवेश करना चाहिए और प्रमुख सावधानियां
उपयुक्त निवेशक प्रोफाइल
- रूढ़िवादी निवेशक (Conservative Investors): वे निवेशक जो शेयर बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव से दूर रहकर बैंक एफडी से बेहतर सुरक्षा और निश्चित रिटर्न की तलाश में हैं।
- स्पष्ट समय सीमा वाले निवेशक: ऐसे व्यक्ति जिनका वित्तीय लक्ष्य 3 से 9 वर्षों के दायरे में स्पष्ट रूप से निर्धारित है।
- उच्च कर स्लैब वाले निवेशक: जो वार्षिक टीडीएस की जटिलताओं से बचते हुए टैक्स डेफरल का लाभ उठाना चाहते हैं।
प्रमुख सावधानियां
- मार्क-टू-मार्केट (MTM) उतार-चढ़ाव: यदि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की जाती है, तो मैच्योरिटी से पहले बीच की अवधि में फंड का NAV अस्थाई रूप से गिर सकता है।
- ‘होल्ड टिल मैच्योरिटी’ (HTM) दृष्टिकोण: ब्याज दर जोखिम को पूरी तरह समाप्त करने का एकमात्र उपाय फंड को उसकी परिपक्वता तिथि तक होल्ड करना है। मैच्योरिटी पर आपको पूर्व-निर्धारित यील्ड ही प्राप्त होती है, भले ही बीच में बाजार में कैसी भी दरें रही हों।
8. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या टारगेट मैच्योरिटी फंड में रिटर्न 100% गारंटीड होता है?
कानूनी रूप से म्यूचुअल फंड्स में ‘गारंटीड’ शब्द का उपयोग प्रतिबंधित है। हालांकि, यदि आप फंड को उसकी अंतिम परिपक्वता तिथि तक होल्ड करते हैं, तो आपको निवेश के समय दर्शायी गई इंडिकेटिव यील्ड (YTM) में से एक्सपेंस रेशियो घटाकर लगभग सटीक रिटर्न प्राप्त होता है। सरकारी सिक्योरिटीज और AAA पीएसयू बॉन्ड होने के कारण डिफ़ॉल्ट जोखिम नगण्य रहता है।
2. क्या मैच्योरिटी पूरी होने पर पैसा अपने आप बैंक खाते में आ जाता है?
हाँ। फंड की निर्धारित मैच्योरिटी तारीख पर पूरी योजना स्वतः समाप्त हो जाती है। पोर्टफोलियो के बॉन्ड्स से प्राप्त मूलधन और अंतिम ब्याज सीधे निवेशक के पंजीकृत बैंक खाते में एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से क्रेडिट कर दिया जाता है।
3. भारत बॉन्ड ईटीएफ (Bharat Bond ETF) में कौन सी कंपनियां शामिल हैं?
भारत बॉन्ड ईटीएफ में केवल केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली शीर्ष महारत्न और नवरत्न कंपनियां शामिल होती हैं, जिन्हें स्वतंत्र रेटिंग एजेंसियों द्वारा ‘AAA’ क्रेडिट रेटिंग प्राप्त है। इनमें मुख्य रूप से NHAI, REC, PFC, IRFC, NTPC, PowerGrid, NPCIL और Indian Oil जैसी संस्थाएं शामिल हैं।
4. क्या TMF में मासिक एसआईपी (SIP) की जा सकती है?
हाँ। यदि आप ‘फंड ऑफ फंड्स’ (FOF) या इंडेक्स फंड रूट के माध्यम से निवेश करते हैं, तो आप ₹500 प्रतिमाह से नियमित एसआईपी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे फंड की मैच्योरिटी नजदीक आती है, नई किस्तों के लिए उपलब्ध समय कम होता जाता है, अतः प्रारंभिक वर्षों में एसआईपी करना सबसे अधिक फायदेमंद रहता है।
5. क्या बिना डीमैट खाते के भी भारत बॉन्ड में निवेश किया जा सकता है?
बिल्कुल। एडलवाइस म्यूचुअल फंड द्वारा भारत बॉन्ड ईटीएफ के समानांतर ‘Bharat Bond Fund of Funds (FOF)’ संचालित किया जाता है। इसमें सामान्य म्यूचुअल फंड की तरह बिना किसी डीमैट खाते के किसी भी ऐप या आधिकारिक वेबसाइट से सीधे निवेश किया जा सकता है।






















